Dehradun….प्रदेश में संचालित हो रहे स्कूली वाहनों के मनमाने किराये वसूलने को लेकर परिवहन विभाग सख्त कदम उठाने जा रहा है। इसको लेकर संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव मेहरा की अध्यक्षा में समिति गठित की गई है। जिसमें उप परिवहन आयुक्त डीसी पठोई, देहरादून आरटीओ (प्रशासन) संदीप सैनी, हल्द्वानी आरटीओ (प्रवर्तन) अरविंद पांडे को सदस्य नियुक्त किया गया है। ट्रांसपोर्ट के नाम पर वसूले जा रहे शुल्क की रिपोर्ट तैयार कर परिवहन आयुक्त को भेजी जाएगी।
मंगलवार को संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव मेहरा के नेतृत्व में स्कूल वाहन संचालन एवं स्कूल प्रबंधन ने वर्चुअल बैठक में हिस्सा लिया। कुछ स्कूल वैन संचालकों ने परिवहन विभाग को ट्रांसपोर्ट के नाम पर लिए जा रहे शुल्क का ब्योरा भी उपलब्ध कराया। लेकिन समिति के सदस्यों को सभी स्कूलों से ट्रांसपोर्ट के नाम पर लिए जा रहे शुल्क की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए। समिति की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट परिवहन आयुक्त को भेजी जाएगी। रिपोर्ट के साथ ही स्कूल प्रबंंधन एवं वाहन संचालकों के सुझाव लिए जाएंगे। जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव मेहरा ने बताया स्कूल बस एवं वैन संचालक किस तरह से ट्रांसपोर्ट के नाम पर शुल्क ले रहा है। इस पर समिति गठित की गई है। उप परिवहन आयुक्त एवं आरटीओ को सदस्य नामित किए गए हैं। समिति रिपोर्ट तैयार कर परिवहन आयुक्त के भेजेगी।जिसके बाद किराए को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
स्कूली वाहनों के निर्धारित किराए के नहीं मानक
परिवहन विभाग की ओर से वाहन स्वामियों को स्टेज कैरिज एवं ठेका परमिट जारी किए जाते हैं। स्टेज कैरिज परमिट की नियम शर्तों के हिसाब से किराया वसूला जाता है। लेकिन ठेका परमिट लेकर बस एवं वैन संचालक स्कूलों में स्कूली छात्र-छात्राओं को लाने ले जाने में काम करते हैं। इसके एवज में अभिभावकों से मनमाने शुल्क वसूलते हैं। स्कूल प्रबंध एवं वाहन संचालक के खिलाफ उच्च न्यायालय में वाद दायर किया गया था। जिसके बाद परिवहन विभाग सख्ते में आया। अब स्कूली वाहनों पर किराया निर्धारित को लेकर विभाग ने समिति गठित कर दी है।
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उत्तराखंड स्कूल वैन एसोसिएशन ने खर्चे का ब्योरा कराया उपलब्ध
उत्तराखंड स्कूल वैन एसोसिएशन ने समिति की बैठक में वाहन पर खर्च धनराशि का ब्योरा उपलब्ध कराया। एसोसिएशन के अध्यक्ष सचिन गुप्ता ने बताया वाहन एवं चालक के वेतन पर प्रति माह 37,955 की धनराशि खर्च की जाती है। जिसमें पेट्रोल का 10 हजार, इंश्योरेंस 22,50, टैक्स 705, मैंटिनेंस 2000 , वैन की बैंक किश्त 11 हजार, चालक का वेतन 14 हजार है। इसके अलावा परिवहन विभाग के नियम -शर्तों के एवज में वाहन पर 48,305 की धनराशि खर्च की गई है। जिसमें वाहन पर जीपीएस 5500, सीसीटीवी कैमरा 4500, रिनुअल 350 की धनराशि शामिल है। बताया समिति को वाहन चालकों की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए। नहीं तो वाहन चालकों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
